सिर्फ एक खास molecule ने बढ़ाई tandem solar cell की efficiency, अब पहुंची 32.76% तक!

सौर ऊर्जा यानी solar energy आज दुनिया की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक है। जब बात होती है fossil fuels से छुटकारा पाने की, तो सूरज की रोशनी से बिजली बनाना सबसे साफ और टिकाऊ रास्ता दिखता है। लेकिन असली चुनौती यह है कि सूरज की जितनी रोशनी धरती पर पड़ती है, उसका बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाता है। यहां तक कि बड़े पैमाने पर लगे सबसे अच्छे solar panels भी सूरज की कुल energy का सिर्फ एक चौथाई हिस्सा ही capture कर पाते हैं। इसीलिए वैज्ञानिक लगातार ऐसी तकनीक खोजते रहते हैं जो ज्यादा से ज्यादा सूरज की रोशनी को बिजली में बदल सके।

Single Molecule Boosts Tandem Solar Cell Efficiency

Perovskite: Silicon से बेहतर, लेकिन नाजुक भी

आमतौर पर solar panels में Silicon का इस्तेमाल होता है, जो एक टिकाऊ और आजमाया हुआ material है। लेकिन Perovskite नाम के crystalline materials ने scientists का ध्यान खींचा है क्योंकि ये silicon की तुलना में कहीं बेहतर तरीके से energy absorb करते हैं। साथ ही, ये कम लागत में बनाए जा सकते हैं, जिससे solar cells सस्ती हो सकती हैं।

मगर यहीं पर एक बड़ी समस्या है। Perovskite बेहद नाजुक होते हैं। नमी, गर्मी या तेज रोशनी में थोड़ा सा भी बदलाव हो तो ये खराब होने लगते हैं। इसीलिए scientists ने एक स्मार्ट solution निकाला जिसे Tandem Solar Cell कहते हैं, जिसमें Perovskite और Silicon की परतें एक के ऊपर एक लगाई जाती हैं ताकि दोनों के फायदे मिल सकें।

Tandem Solar Cell में भी आती हैं मुश्किलें

Tandem Solar Cell बनाने के दौरान एक बड़ी दिक्कत सामने आती है। Silicon wafers बहुत जल्दी गर्म हो जाते हैं और यह गर्मी perovskite layer में पहुंच जाती है। इससे perovskite बहुत तेजी से crystallize होने लगता है, यानी उसकी परत में crystals बहुत जल्दी और बेतरतीब ढंग से बनने लगते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि cell के chemical components अलग होने लगते हैं और solar cell की उम्र घट जाती है।

यह समस्या manufacturing के दौरान सबसे ज्यादा होती है। Tunnel Oxide Passivated Contact (TOPCon) जैसी advanced silicon wafer technologies में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि ऐसी wafers की thermal conductivity ज्यादा होती है, यानी वे heat को और तेजी से transfer करती हैं।

National University of Singapore की बड़ी खोज

इस समस्या का हल ढूंढने के लिए National University of Singapore के researchers ने Zhejiang Jinko Solar Co. Ltd. और अन्य संस्थानों के साथ मिलकर एक खास molecule पर प्रयोग किया जिसका नाम है 2-Mercaptobenzothiazole (MBT)। यह एक organic compound है जिसे आमतौर पर rubber industry में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे solar cell technology में आजमाना एक नया और दिलचस्प प्रयोग था।

यह molecule कैसे काम करता है?

2-Mercaptobenzothiazole की एक खासियत यह है कि यह perovskite के organic cations के साथ dual-mode binding करता है, यानी यह दो तरीकों से perovskite की संरचना से जुड़ता है। इससे manufacturing के दौरान crystallization की रफ्तार धीमी हो जाती है। जब crystallization धीरे-धीरे होती है तो crystal films में defects बहुत कम बनते हैं। कम defects का मतलब है बेहतर efficiency और लंबी उम्र।

इस प्रक्रिया को शोधकर्ताओं ने अपने research paper में इस तरह बताया कि यह molecule crystallization dynamics को modulate करता है, जिससे perovskite layer की quality में जबरदस्त सुधार होता है।

32.76% efficiency: एक ऐतिहासिक उपलब्धि

इस molecule को Tandem Solar Cell में जोड़ने के बाद researchers को जो नतीजे मिले, वो बेहद उत्साहजनक हैं। Prototype tandem solar cells में 2 महीने के operation के बाद certified stabilized power conversion efficiency 32.76% मापी गई। इतना ही नहीं, यह cell 1,700 घंटे तक लगातार काम करने के बाद भी अपनी initial efficiency का 91% बनाए रखती है।

यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि अकेले Silicon solar cells की theoretical maximum efficiency लगभग 29.4% ही है। Perovskite/Silicon tandem solar cells 2015 में पहली बार दिखाई गई थीं और तब से इनकी efficiency में जबरदस्त सुधार हुआ है। इस नए शोध के नतीजे Nature Energy जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।

Global Race: कौन कहां है?

यह जानना भी जरूरी है कि tandem solar cells की दुनिया में competition बहुत तेज है। LONGi Solar ने अप्रैल 2025 में perovskite-tandem solar cell के लिए 34.85% efficiency का world record बनाया है, जिसे NREL ने verify किया है। इसके अलावा JinkoSolar ने भी अपनी perovskite-silicon tandem solar cells की efficiency 34.76% तक पहुंचाई है।

ऐसे में National University of Singapore की 32.76% efficiency की उपलब्धि इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह एक certified और stable performance है। यानी यह lab में एक बार दिखाई गई नहीं, बल्कि लंबे समय तक यह efficiency बनाए रखी गई।

क्या यह तकनीक बड़े पैमाने पर काम आएगी?

Researchers का मानना है कि 2-Mercaptobenzothiazole molecule को large-scale tandem cell manufacturing में भी आसानी से शामिल किया जा सकता है। इसकी कुछ बड़ी वजहें हैं:

  • यह molecule पहले से ही industry में इस्तेमाल होता है, इसलिए इसे बड़े पैमाने पर बनाना मुश्किल नहीं है।
  • इसे manufacturing process में शामिल करना ज्यादा जटिल नहीं है।
  • यह न सिर्फ efficiency बढ़ाता है, बल्कि solar cell की उम्र भी बढ़ाता है।
  • इससे production cost में बड़ा बदलाव किए बिना बेहतर नतीजे मिल सकते हैं।

भविष्य की राह

सौर ऊर्जा का भविष्य Perovskite-Silicon Tandem Solar Cells में नजर आता है। Tandem solar cells का design sunlight को अकेले silicon cells की तुलना में कहीं ज्यादा efficiently इस्तेमाल करता है, क्योंकि ऊपरी perovskite layer high-energy blue spectrum को absorb करती है जबकि नीचे की silicon layer red spectrum को capture करती है। इस तरह सूरज की रोशनी का एक बड़ा हिस्सा बिजली में बदल जाता है।

एक खास molecule की मदद से 32.76% efficiency हासिल करना यह दिखाता है कि कभी-कभी बड़े बदलाव के लिए बहुत बड़ी नई technology की जरूरत नहीं होती। एक सही molecule, सही समझ और सही प्रयोग से भी solar energy की दुनिया में क्रांति आ सकती है। यह शोध न सिर्फ वैज्ञानिकों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए एक उम्मीद की किरण है जो एक साफ और हरित भविष्य चाहते हैं।

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