केंद्र सरकार ने PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने 30 मार्च 2026 को एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया, जिसमें रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के लिए DCR (Domestic Content Requirement) सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। यह बदलाव उन उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो सरकारी सब्सिडी नहीं लेना चाहते, लेकिन फिर भी सोलर सिस्टम लगाकर बिजली बिल कम करना चाहते हैं। अजमेर डिस्कॉम में यह सर्कुलर आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है।

PM Surya Ghar Yojana क्या है?
PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे फरवरी 2024 में लॉन्च किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर उन्हें मुफ्त या सस्ती बिजली उपलब्ध कराना है। इसके तहत सरकार पात्र उपभोक्ताओं को CFA यानी Central Financial Assistance के रूप में सब्सिडी देती है। अजमेर डिस्कॉम के एमडी केपी वर्मा के अनुसार, अब तक देशभर में 27 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन पूरी हो चुकी है, जो योजना की सफलता का प्रमाण है।
DCR सर्टिफिकेट की बाध्यता क्यों थी?
DCR यानी Domestic Content Requirement एक ऐसा नियम है जिसके तहत सोलर पैनल भारत में निर्मित होने अनिवार्य थे। इसका मकसद था कि सरकारी सब्सिडी का लाभ केवल देशी उत्पादों को मिले और आत्मनिर्भर भारत के तहत घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाए। इसीलिए पहले सभी आवेदकों के लिए DCR सर्टिफिकेट जमा करना जरूरी था, चाहे वे सब्सिडी लें या नहीं। अब MNRE ने इस नियम में ढील देकर सब्सिडी न लेने वाले उपभोक्ताओं को Non-DCR पैनल इस्तेमाल करने की छूट दे दी है।
नए बदलाव में क्या है खास?
Give It Up विकल्प हुआ और आसान
MNRE ने नेशनल पोर्टल पर “Give It Up” विकल्प को और सरल बना दिया है। अब उपभोक्ता जो सरकारी सब्सिडी (CFA) नहीं लेना चाहते, वे सीधे बिना DCR सर्टिफिकेट के आवेदन कर सकते हैं। इससे आवेदन प्रक्रिया काफी तेज और परेशानीमुक्त हो गई है।
मुख्य नए प्रावधान इस प्रकार हैं:
- उपभोक्ता “Give It Up” विकल्प चुनकर सब्सिडी छोड़ सकते हैं और Non-DCR पैनल लगा सकते हैं।
- बिना DCR सर्टिफिकेट के जमा आवेदन में, एक बार इंस्टॉलेशन कन्फर्म होने के बाद “Give It Up” विकल्प को बदला नहीं जा सकेगा।
- जो उपभोक्ता DCR सर्टिफिकेट के साथ आवेदन करते हैं, वे Redemption Stage तक अपना विकल्प बदल सकते हैं।
- यह सुविधा केवल उन्हीं उपभोक्ताओं के लिए है जो CFA का लाभ नहीं लेना चाहते।
DCR और Non-DCR पैनल में क्या अंतर है?
यह बदलाव आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद है। डिस्कॉम एमडी केपी वर्मा ने बताया कि बाजार में एक किलोवॉट का DCR पैनल 23 से 24 रुपए प्रति वॉट की दर से मिलता है, जबकि Non-DCR पैनल केवल 13 से 14 रुपए प्रति वॉट में उपलब्ध है। एक किलोवॉट के सिस्टम पर यह अंतर करीब 10,000 रुपए तक का होता है। यानी अगर कोई उपभोक्ता 3 किलोवॉट का सोलर सिस्टम लगाता है, तो वह Non-DCR पैनल चुनकर लगभग 30,000 रुपए तक की बचत कर सकता है। हालांकि, ऐसे उपभोक्ताओं को सरकारी सब्सिडी नहीं मिलेगी, इसलिए उन्हें दोनों विकल्पों का कुल खर्च और फायदा ध्यान से तुलना करनी चाहिए।
अन्य महत्वपूर्ण अपडेट
MNRE ने हाल ही में रूफटॉप सोलर सिस्टम में लगे डेटालॉगर्स के लिए Firmware Development Guidelines का ड्राफ्ट भी जारी किया है। यह गाइडलाइन लोकल डिवाइस कॉन्फ़िगरेशन और रिमोट कम्युनिकेशन API को नियंत्रित करेगी, जिससे सोलर सिस्टम की मॉनिटरिंग और भी बेहतर होगी। इसके अलावा, पिछले साल अगस्त 2025 में MNRE ने स्पष्ट किया था कि ULA यानी Utility-Led Aggregator और RESCO मोड के तहत केवल रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट ही शामिल होंगे। ग्राउंड-माउंटेड या कम्युनिटी सोलर प्रोजेक्ट को MNRE की विशेष अनुमति के बाद ही इस मोड में शामिल किया जा सकेगा।
आम उपभोक्ता के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव?
यह नीतिगत बदलाव उन लाखों उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी है जो अब तक सोलर सिस्टम लगाने से इसलिए हिचक रहे थे क्योंकि DCR पैनल की ऊंची कीमत उनकी पहुंच से बाहर थी। अब वे सस्ते Non-DCR पैनल से भी योजना में शामिल हो सकते हैं। सरकार का लक्ष्य एक करोड़ घरों तक इस योजना को पहुंचाना है और अब तक 27 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन हो चुके हैं। इस बदलाव से योजना की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है। यदि आप भी अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाना चाहते हैं, तो PM Surya Ghar के राष्ट्रीय पोर्टल pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं और अपने लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकते हैं।
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