36% ज्यादा बिजली बनायेंगे Round Solar Panel!

सोलर एनर्जी की दुनिया में एक ऐसी क्रांति आने वाली है जो 140 साल पुरानी सोच को पूरी तरह बदल देगी। जब से सोलर पैनल बने हैं, तब से वे सपाट यानी फ्लैट ही रहे हैं। लेकिन अब जापान की एक कंपनी ने यह साबित कर दिया है कि सोलर पैनल का फ्लैट होना जरूरी नहीं है। गोल यानी स्फेरिकल सोलर सेल पारंपरिक पैनलों से कहीं ज्यादा बिजली बना सकते हैं और यही तकनीक आने वाले समय में रिन्यूएबल एनर्जी की तस्वीर बदलने वाली है।

Round Solar Panels Generate 36 percent More Power

140 साल पुरानी सोच को किसने बदला?

सोलर एनर्जी की नींव साल 1883 में पड़ी थी, जब चार्ल्स फ्रिट्स ने सेलेनियम और पतली मेटल लेयर से बिजली बनाने वाला पहला सोलर सेल तैयार किया था। उस दौर की तकनीक और उपलब्ध मटेरियल के कारण सोलर पैनल का फ्लैट होना एक मजबूरी बन गई और धीरे-धीरे यही डिजाइन पूरी दुनिया में स्टैंडर्ड बन गया।

फ्लैट पैनल में एक बड़ी कमी हमेशा से रही है। सूरज दिन भर अलग-अलग एंगल से रोशनी देता है, लेकिन स्थिर और सपाट पैनल केवल एक सीमित दिशा से ही ऊर्जा ले पाते हैं। करीब 140 साल तक किसी ने इस मूल सवाल को गंभीरता से नहीं पूछा कि आखिर सोलर पैनल का फ्लैट होना जरूरी क्यों है।

जापान की कंपनी Kyosemi के फाउंडर मिस्टर नकाटा ने इसी सवाल को एक चुनौती के रूप में लिया। उन्होंने सोचा कि जब सूरज की किरणें हर दिशा से आती हैं, तो सोलर सेल का आकार भी ऐसा क्यों न हो जो हर दिशा से रोशनी ले सके। इसी सोच से Sphelar® नाम के गोल स्फेरिकल सोलर सेल का कॉन्सेप्ट जन्मा।

Sphelar® यानी गोल सोलर सेल क्या है?

Sphelar® छोटे-छोटे गोल सिलिकॉन बीड्स होते हैं जिनका आकार लगभग 1 से 2 मिलीमीटर होता है। हर एक गोल बीड एक इंडिपेंडेंट सोलर सेल की तरह काम करता है और इसमें दोनों तरफ इलेक्ट्रोड्स होते हैं। इन्हें ग्लास, प्लास्टिक या फ्लेक्सिबल शीट में एम्बेड किया जा सकता है।

सबसे खास बात यह है कि इन गोल सेल्स में लाइट एब्जॉर्प्शन 2D यानी एक सतह पर नहीं बल्कि पूरी 3D सरफेस पर होती है। इसका मतलब यह है कि डायरेक्ट सनलाइट के अलावा रिफ्लेक्टेड और डिफ्यूज लाइट भी इन सेल्स के काम आती है, जो फ्लैट पैनल में बर्बाद हो जाती थी।

माइक्रोग्रैविटी में हुई थी इसकी खोज

इस आइडिया को हकीकत में बदलने के लिए जापान में JAMIC यानी Japan Microgravity Center की मदद ली गई। यहां एक पुरानी खदान को माइक्रोग्रैविटी रिसर्च सेंटर में बदला गया और 500 मीटर से ज्यादा ऊंचाई से वैक्यूम कैप्सूल गिराकर वजनरहित वातावरण बनाया गया। इस वातावरण में पिघला हुआ सिलिकॉन सरफेस टेंशन की वजह से खुद-ब-खुद परफेक्ट गोल आकार में जम गया।

सबसे बड़ी चुनौती गोल सोलर सेल की कर्व्ड सतह पर P-N जंक्शन बनाना था, लेकिन Kyosemi की ऑप्टो-सेमीकंडक्टर तकनीक ने इसे भी संभव बना दिया। साल 1998 में कंपनी ने अपनी खुद की माइक्रोग्रैविटी लैब शुरू की और इंडस्ट्री को सैंपल पैनल सप्लाई करने लगी।

Round Solar Panel के बड़े फायदे

हर दिशा से सनलाइट कैप्चर

फ्लैट पैनल सिर्फ एक एंगल पर सबसे अच्छा काम करते हैं। Sphelar® सेल्स डायरेक्ट, रिफ्लेक्टेड और डिफ्यूज तीनों प्रकार की लाइट को यूज कर सकते हैं। इससे पूरे दिन ज्यादा स्टेबल पावर जनरेशन होती है और अलग-अलग स्टडीज में फ्लैट पैनलों की तुलना में 15 से 36 प्रतिशत तक ज्यादा आउटपुट देखा गया है।

सोलर ट्रैकिंग सिस्टम की जरूरत नहीं

पारंपरिक फ्लैट पैनल्स के साथ अक्सर सन-ट्रैकिंग सिस्टम लगाना पड़ता है जो सूरज की दिशा के अनुसार पैनल को घुमाता रहता है। Sphelar® सेल्स खुद ही मल्टी-एंगल लाइट कैप्चर कर लेते हैं, जिससे ट्रैकिंग सिस्टम की जरूरत काफी कम हो जाती है और ओवरऑल सिस्टम कॉस्ट और मेंटेनेंस दोनों घटते हैं।

धूल और गर्मी की समस्या कम

गोल आकार पर धूल उतनी आसानी से नहीं जमती जितनी फ्लैट सरफेस पर जमती है। इसके अलावा गोल सेल में हीट डिसीपेशन यानी गर्मी का फैलाव भी बेहतर होता है, जो सेल की लाइफ और एफिशिएंसी दोनों के लिए फायदेमंद है।

बादल वाले दिन भी बेहतर परफॉर्मेंस

क्लाउडी डे, इनडोर लाइट या कम रोशनी में भी Sphelar® सेल काम करते रहते हैं क्योंकि ये रिफ्लेक्टेड और डिफ्यूज लाइट को भी एब्जॉर्ब कर सकते हैं। यह खासियत भारत जैसे देशों के लिए बहुत उपयोगी है जहां मानसून सीजन में महीनों तक बादल छाए रहते हैं।

कहां-कहां हो सकता है इस्तेमाल?

Round Solar Panel की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें उन जगहों पर भी लगाया जा सकता है जहां फ्लैट पैनल लगाना संभव नहीं था।

  • सोलर विंडो: ग्लास में एम्बेड करके 20 से 80 प्रतिशत ट्रांसपेरेंसी के साथ बिजली बनाना संभव है।
  • BIPV यानी बिल्डिंग इंटीग्रेटेड फोटोवोल्टेक: बिल्डिंग की दीवारें और छतें खुद बिजली बना सकती हैं।
  • सोलर फैब्रिक: कपड़ों और टेक्सटाइल में इन्हें इंटीग्रेट करके वियरेबल सोलर टेक्नोलॉजी तैयार की जा सकती है।
  • कर्व्ड सरफेस: कार की छत, डोम, और इर्रेगुलर शेप्स पर भी आसानी से लगाए जा सकते हैं।
  • IoT और स्मार्ट डिवाइसेज: छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सोलर पावर देना अब और आसान हो जाएगा।

भारत के लिए क्यों है यह तकनीक खास?

भारत सरकार ने 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य रखा है और सोलर एनर्जी इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाली है। ऐसे में Round Solar Panel जैसी तकनीक भारत के लिए बेहद प्रासंगिक है। घनी आबादी वाले शहरों में छत पर पैनल लगाने की जगह कम होती है, लेकिन अगर खिड़कियां, दीवारें और दरवाजे भी बिजली बना सकें तो एनर्जी की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।

नई सोच से बदलेगी सोलर की दुनिया

जापान ने यह साबित कर दिया कि सवाल पूछने की हिम्मत और नई सोच किसी 140 साल पुरानी तकनीक को भी बदल सकती है। Sphelar® सोलर सेल अभी कमर्शियल स्तर पर बड़े पैमाने पर उपलब्ध नहीं हैं और इनकी मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट अभी थोड़ी ज्यादा है, लेकिन जैसे-जैसे यह तकनीक स्केल होगी, इसकी कीमत भी कम होती जाएगी।

Round Solar Panel सिर्फ एक नया प्रोडक्ट नहीं है, यह उस पुरानी सोच को चुनौती है जो कहती थी कि सोलर पैनल हमेशा फ्लैट और एक ही दिशा में होना चाहिए। आने वाले समय में जब हमारी बिल्डिंग्स, कपड़े, गाड़ियां और खिड़कियां भी बिजली बनाने लगेंगी, तब हम उस दिन को याद करेंगे जब एक जापानी इंजीनियर ने यह सरल सवाल पूछा था कि सोलर पैनल गोल क्यों नहीं हो सकता।

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